855 साल की परंपरा से छेड़छाड़! शाह मोहम्मद शाह उर्फ काठा पीर दरगाह मेले की तारीख बदलने पर बवाल

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दूरदर्पण न्यूज़  फरज़ाना खातून

 

मेला ठेकेदार पर मनमानी का आरोप, श्रद्धालुओं ने उठाई प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग :- धर्म और आस्था की गरिमा पर संकट”

मेला ठेकेदार पर मनमानी का आरोप

मेले की तिथि से छेड़छाड़ पर भड़के खादिम और भक्त, बोले: हमारी आस्था कोई बोली नहीं जो ठेकेदार खरीद ले!

 

हरिद्वार। पथरी जंगल क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक शाह मोहम्मद शाह उर्फ काठा पीर दरगाह पर लगने वाले सदियों पुराने मेले की तारीख में बदलाव को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। दरगाह के खादिम, पक्षकारों और स्थानीय श्रद्धालुओं ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए मेला ठेकेदार पर परंपराओं की अनदेखी और आस्था से खिलवाड़ के गंभीर आरोप लगाए हैं।


जानकारी के अनुसार यह मेला पिछले 856 वर्षों से गृह नक्षत्रों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आयोजित होता आ रहा है, जिसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख सभी धर्मों के लाखों श्रद्धालु चादर एवं प्रसाद चढ़ाकर मन्नत मांगते हैं। इस वर्ष यह मेला 9 जून से लगना था, लेकिन मेला ठेकेदार ने कथित तौर पर कुछ लोगों से मिलीभगत कर तारीख बदलकर मेला आगे बढ़ा दिया, जिससे वर्षों पुरानी परंपरा टूटने की कगार पर है।

दरगाह के खादिम फुरकान ने कहा कि, “यह केवल तारीख बदलने का मामला नहीं, लाखों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा मुद्दा है। ऐसे लोगों को बख्शा नहीं जाना चाहिए जो धर्मस्थलों की गरिमा से खिलवाड़ कर रहे हैं। वहीं श्रद्धालु पुत्तन ने भी प्रशासन से मामले की जांच कर कड़ी कार्रवाई की मांग की।

पक्षकारों ने यह भी आरोप लगाया कि पारंपरिक दुकानदारों को दरकिनार कर मेला ठेकेदार ने अपने चहेते लोगों को दुकानें आवंटित की हैं, जो नियमों के खिलाफ है। इससे पारदर्शिता और निष्पक्षता दोनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

इस मामले में एसडीएम लक्सर सौरभ असवाल ने मीडिया को बताया कि , हमें मेला तिथि बदलने को लेकर कुछ लोगों द्वारा पत्र सौंपा गया है। अगर आयोजन में कोई अनियमितता पाई जाती है तो नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी

आपको बता दे कि पथरी स्थित काठा पीर का यह मेला पांच दिन तक चलता है, और हर साल यहां हिंदू-मुस्लिम-सिख समुदाय के हजारों लोग एक साथ जुटते हैं, जो गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल है। ऐसे में इस मेले से जुड़ी किसी भी परंपरा में छेड़छाड़ सिर्फ तिथि का मामला नहीं, एकता और आस्था की बुनियाद पर प्रहार जैसा माना जा रहा है।

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